Wireless charging एक ऐसी technology है जो आने वाले समय में दुनिया बदल ने वाला हैं। आज से 5–10 साल बाद आपको सब कुछ wireless ही दिख ने वाला हैं। अगर बात करे wireless technology के बारे में तो ये कोई नई technology नहीं है। आज से 100 साल पहले ही Nicola Tesla ने ये साबित कर के दिखाया था की wireless technology possible है।

कुछ समय बाद जितने भी charge होने वाले device है वो सब wireless charging को support करेंगे, यहां तक की car, bike भी wireless technology से ही charge होंगे। पर ऐसे होने में अभी वक्त है इसलिए अभी हम बस फ़ोन के wireless charging के बारे में बात करेगें। इस article में हम जानेंगे की आखिर ये wireless charging किस तरह से काम करता है और इसके क्या फायदे हैं, इसलिए आप आप इस article को पूरा पढ़ना।

I phone Wireless charging


Wireless charging क्या hai?


Wireless charging एक बहुत ही बढ़िया concept है जो देखने में भी बहुत advance technology लगता है। आप अपने फोन को charge करने के लिए किसी cable wire का इस्तेमाल करते होंगे पर जैसा की इसके नाम में है आप इसको इस्तेमाल से बिना किसी cable wire के अपने फ़ोन को charge कर सकते हो। आपको इसमें एक charging pad मिलता है जिस पर आप अपने फ़ोन को जैसे ही रखोगे आपका फोन charge होने लगेगा। 

Wireless charging इस वक्त पुरा wireless नहीं है क्योंकि फ़ोन में भले की wire को connnect करने की जरूरत नहीं पड़ती पर जो charging pad होता हैं वोह cable wire से plug में connected रेहता हैं। Plug से जो बिजली आती है उसी पर फ़ोन charge होता हैं।


Wireless charging काम कैसे करता है?

Transmitter और receiver ये दो main चीज़ है जिसकी वजह से wireless charging technology काम करती हैं। Charging pad के अंदर transmitter होता है जोकि copper coil से बना हुआ होता हैं। Transmitter का काम है electricity ko electro magnetic waves में बदलना। फोन के अंदर receiver होता है और वो भी copper coil से बना हुआ होता हैं। Receiver electromagnetic waves को वापस electricity में बदल देता हैं।

Transmitter electro magnetic waves को छोड़ता है और जब हम फोन को charging pad पे रखते है तो दोनो transmiter और receiver ek दूसरे के रेंज में आ जाते हैं। फोन का receiver electromagnetic waves को receive करता है है और उसको electricity में बदल देता है और सारी energy battery को supply कर देता है। जिस से battery charge होने लगती हैं। 

इसको अगर एक लाइन में समझे तो तो ये कुछ इस तरह काम करता हैं। Electricity>charging pad – transmitter> electromagnetic waves > phone – receiver> electricity> battery charge। अब transmitter और receiver के अंदर का coil जितना बड़ा होगा उसके अंदर से उतना ही ज्यादा electricity पास होगा। तो कुछ इस तरह से wireless charging काम करता हैं।


Wireless charging mein qi kya hai?


Qi असल में global standard है wireless charging device के लिए। आप इसको blue tooth की तरह समझ सकते हो, जैसे किसी दो device जिनमें blue tooth है उनके बीच data transfer हो सकता है, qi भी कुछ ऐसा ही हैं। अगर कोई charging pad है जो qi charging support करता है तो दूसरा कोई भी phone जो qi को support करता है, उस charger से charge हो सकता है।

Qi को बनाने का main logic यह था कि मान लो कोई charging pad है जो qi technology से बना है और phone किसी दुसरे technology से बना है। तो वो फोन उस charger से charge नहीं हो पाएगा। बोहोत सारी अलग अलग technology के चार्जर होने से अच्छा है कोई एक technology का charger हो। अगर हर कंपनी खुद की technology से wireless charger बनाएगी तो बहुत प्रॉब्लम होगी। इस वजह से अब फोन को qi certified किया जा रहा है ताकि कोई भी qi फोन किसी भी qi charger से चार्ज हो सके।

Phone charging with wireless charger


अगर कोई फोन है जो qi charging support नहीं करता है तो आप उस फोन के लिए qi wireless charging case खरीद सकते हो। Charging case को फोन में लगाने पर फोन qi charging को सपोर्ट करने लगता है। Qi charging के idea की वजह से seperate charger को carry करने की जरूरत खत्म हो गई है। क्योंकि किसी भी qi charging device को qi charging pad से charge किया जा सकता है। बहुत सारे android और I phone device भी qi certified हो चुके और कुछ हो रहे हैं। हो सकता है आपका अगला फोन भी qi charging support करता हो।


क्या wireless charging aapke phone ki battery ko kharab karta hai? 


इस सवाल का जवाब हां भी है और नहीं भी। नॉर्मल चार्जिंग से भी चार्ज करने पर भी आपकी बैटरी डैमेज होती है। हर बैटरी के कुछ साइकिल होते है। जवाब बैटरी को 0–100% तक एक बार चार्ज करते हो तो उसकी एक साइकिल complete होती है ऐसे ही 100 साइकिल्स कंप्लीट होने पर बैटरी की 20% life कम हो जाती है। 

काफी फोन में 500 साइकिल्स कंप्लीट होने पर 20% लाइफ कम होती है। ऐसा वायरलेस चार्जिंग के साथ भी होता है जितनी ज्यादा बैटरी के cycles complete होते हैं उतनी ही बैटरी life कम होती है। अगर charger अच्छी technology से नहीं बना होगा तो वोह भी बैटरी को डैमेज करेगा।


Wireless charging के फ़ायदे और नुक्सान?


फ़ायदे

  •  फोन के चार्जिंग प्वाइंट के डैमेज होने का खतरा नहीं।
  • फोन charge करने का एक सुरक्षित तारिका।
  • इस्तमाल करना आसान।


नुकसान


  • फोन ज्यादा heat होता है।
  • चार्जिंग स्लो होती है normal charging के मुकाबले।
  • हर फोन में सपोर्ट नहीं करता।
  • Charge करते समय फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकते।



क्या फोन में case/ back cover लगाकर चार्जिंग कर सकते हैं?


आपके मन में भी यह सवाल आया होगा कि क्या आप फोन में back cover लगाकर wireless charger से चार्ज कर सकते हैं कि नहीं? Back cover होने के बावजूद भी आपका फोन wireless चार्जिंग सपोर्ट करेगा और फोन charge होगा। कुछ back cover बहुत ज्यादा मोटे होते हैं जिनकी वजह से charging speed slow हो सकती है। बेहतर होगा आप फोन को बिना cover के चार्ज में लगाए।


Smart phone brands जो wireless charging support करते हैं?

नीचे मैंने कुछ popular phone brand के फोन models के नाम दिए हैं जो कि wireless charging को सपोर्ट करते हैं।


  • Apple - iphoneXS max, iPhone XS.
  • Huawei - p30 pro, p20 pro.
  • LG - G8 thinQ.
  • Motorola - z series.
  • Nokia - 9 pureview.
  • Samsung - Galaxy fold, Galaxy note 9.
  • Google - pixel 3xl
  • Blackberry - evolve x
  • Sony - xperia x23.


Wireless charging का भविष्य

इस समय wireless charging उतना develop नहीं हुआ है। पर कुछ सालों बाद ये हमारी सोच से भी ज्यादा बदलने वाला है। अभी हम charging pad से फोन को चार्ज करते हैं पर भविष्य मे हो सकता है हमारे पास charging table हो या फिर charging floor हो और उस वक्त फोन में wireless charging से होने वाली heating problem भी solve हो जाए। अभी ऐसी technology पर research चालू है की charging pad से फोन कुछ मीटर दूरी पर हो फिर भी फोन चार्ज हो सके। इन बातों से आप wireless charging के भविष्य का अनुमान लगा सकते हो।